मंगलवार को बाल क्यों नहीं कटवाएं ?
मंगलवार को बाल क्यों नहीं कटवाएं ? Tuesday ko baal kyun nahi katvaye ?
दोस्तों इंसानी दिमाग का यह स्वभाव है कि वह 'डर' को जल्दी मानता है। अगर पुराने समय में कोई बुजुर्ग कहता कि "रात में या मंगलवार को नाखून मत काटो, अंधेरे में उंगली कट जाएगी," तो शायद युवा पीढ़ी इसे अनसुना कर देती। लेकिन जब यह कहा गया कि "मंगलवार को नाखून काटने से पाप लगेगा या घर में गरीबी आएगी," तो डर के मारे लोगों ने इसे बिना सवाल किए मान लिया। पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह डर बढ़ता गया और असली कारण पीछे छूट गया।
आइए जानते है इसका असली कारण –पुराने समय में समाज की व्यवस्था अलग थी। नाई (barber) पूरा सप्ताह काम करते थे और उन्हें भी आराम के लिए एक दिन चाहिए होता था। जैसे गुरुकुलों में रविवार को अवकाश नहीं होता अपितु पूर्णिमा, अमावस्या अथवा अष्टमी में होता है, उसी प्रकार ज्यादातर गांवों और कस्बों में नाइयों की छुट्टी तय कर दी गई थी। धीरे-धीरे यह एक नियम बन गया कि "मंगलवार को बाल नहीं कटवाते।
मंगलवार को बाल क्यों नहीं कटवाएं ? दूसरा कारण -
दूसरा कारण गुरुवार या अन्य विशेष दिनों को अक्सर घर की साफ-सफाई या भगवान की पूजा के लिए रखा जाता था। बाल काटने के बाद नहाना जरूरी माना जाता था, और पुराने समय में पानी कुएं या नदी से भरकर लाना पड़ता था। बेवजह पानी और समय की बर्बादी रोकने के लिए भी कुछ दिन बाल धोने या काटने की मनाही कर दी गई।
आधुनिक समय में विज्ञान की नजर में बाल और नाखून दोनों ही 'केराटिन' (Keratin) नाम के मृत प्रोटीन (Dead Cells) से बने होते हैं। इनमें कोई जान नहीं होती, इसीलिए इन्हें काटने पर हमें दर्द नहीं होता। सप्ताह के सातों दिन ब्रह्मांड और पृथ्वी की स्थिति लगभग एक जैसी ही काम करती है। दिन या वार का इन मृत कोशिकाओं को काटने से कोई भी वैज्ञानिक या शारीरिक संबंध नहीं है।
आज हमारे पास नेल क्लिपर, ट्रिमर, बेहतरीन रोशनी, और फर्स्ट-एड की पूरी सुविधा है। इसलिए अपनी सुविधा और हाइजीन (साफ-सफाई) के अनुसार किसी भी दिन इन्हें काटना पूरी तरह सुरक्षित है।दोस्तों ऐसा वेद शास्त्रों में कहीं भी कोई कारण नहीं है जहां यह लिखा हो कि इस दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए |