Reply To Rajkumar Bhati Speech | ब्राह्मण वैश्या के समान है ?

Brahman Viashya Ke saman hai ?

Reply To Rajkumar Bhati Speech | ब्राह्मण वैश्या के समान है ?

जब कोई व्यक्ति तथ्यों के साथ सच्चाई सामने रखने का प्रयास करता है, तो गौतम खट्टर को जेल हो जाती है। जब कोई किसी अन्य पंथ की मान्यताओं पर विमर्श करता है, तो नूपुर शर्मा को अपने जीवन और करियर की असहनीय हानि झेलनी पड़ती है। लेकिन, वही कानून और वही समाज तब मौन क्यों हो जाता है जब राजकुमार भाटी जैसे लोग सरेआम हिंदू धर्म, प्रभु राम और ब्राह्मण वर्ग पर अपमानजनक आक्षेप लगाते हैं? जब जे एन यू में ब्राह्मणत्व से आजादी के नारे लगते हैं तब कोई उन पर एक्शन क्यों नहीं लिया जाता । ये एक ऐसा व्यक्ति है जो सबसे बडा महापुरुष मोहम्मद साहब को मानता है, उनसे अलग इसे महापुरुष नज़र ही नही आता । ये वो इंसान है जो सबसे अच्छा विवाह इस्लाम का मानता है । और हिन्दुओं उनके देवी देवताओं और ब्राह्मणों को गाली देता रहता है ।

60% फांसी ब्राह्मणों को हुई है ?

दोस्तों भारतीय इतिहास इस बात का साक्षी है कि ब्राह्मणों ने सदैव 'राष्ट्र प्रथम' के सिद्धांत को सर्वोपरि रखा है। जब-जब देश पर बाहरी संकट आया या आंतरिक विखंडन की स्थिति बनी, ब्राह्मण वर्ग ने अपनी सुख-सुविधाओं का त्याग कर राष्ट्र को संगठित करने का बीड़ा उठाया। आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि ब्रिटिश काल के समय फांसी का टेबल देखोगे ना तो ब्रिटिश काल में सबसे ज़्यादा फांसी ब्राह्मणों को हुई है, ये ऑनरिकोर्ड है …६०% फांसी ब्राह्मणों को हुई है । और आज उन्हीं बलिदानियों में अग्रणी रहने वाले ब्राह्मणों को बदनाम किया जा रहा है ।

History Of Brahmins ?

दूसरी बात दोस्तों जब मुगल आक्रांताओं ने जनेऊ और शिखा काटी, तब कश्मीरी पंडितों और ब्राह्मणों ने अपनी गर्दन कटाना स्वीकार किया लेकिन धर्म कभी नहीं छोड़ा। लोग भूल जाते हैं कि मध्यकाल में जब आक्रांताओं ने नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों को जलाया, तब यह ब्राह्मण वर्ग ही था जिसने वेदों और शास्त्रों को 'कंठस्थ' करके सुरक्षित रखा था।

अगर आज हमारे पास वेद हैं, उपनिषद हैं या विज्ञान की प्राचीन विधाएं हैं, तो वह केवल इसलिए क्योंकि किसी ब्राह्मण ने उसे अपनी स्मृति में जीवित रखा था। आचार्य चाणक्य ने केवल एक राजा (धनानंद) को नहीं हटाया, बल्कि एक विदेशी आक्रांता (सिकंदर) के विरुद्ध पूरे भारत को खड़ा कर दिया था। उन्होंने चंद्रगुप्त जैसे एक साधारण बालक को सम्राट बनाकर यह सिद्ध किया कि ब्राह्मण सत्ता का भूखा नहीं होता, बल्कि राष्ट्र का रक्षक होता है।

Chanakya & Chandragupta
nalanda vishvavidyalaya

आदि शंकराचार्य: जब भारतीय संस्कृति और दर्शन बिखर रहा था, तब केरल के एक ब्राह्मण बालक ने पूरे भारत की पैदल यात्रा की, चार मठों की स्थापना की और विलुप्त होती सनातन परंपरा को पुनर्जीवित किया।

adi shankaracharya

स्वतंत्रता संग्राम में मंगल पांडे, चंद्रशेखर आजाद, पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, वीर सावरकर, सुखदेव, राजगुरु, बाल गंगाधर तिलक जैसे ब्राह्मण वीरों ने यह दिखाया कि उनके लिए अपनी मातृभूमि से बढ़कर कुछ नहीं है।
पेशवा बाजीराव प्रथम: ब्राह्मण होने के बावजूद उन्होंने शस्त्र उठाए और मराठा साम्राज्य का विस्तार अटक (पाकिस्तान) से कटक तक किया।
राजा राममोहन राय: सती प्रथा जैसी कुरीतियों के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाने वाले एक ब्राह्मण ही थे। ईश्वर चंद्र विद्यासागर: विधवा विवाह और स्त्री शिक्षा के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन संघर्ष में झोंक दिया।

इससे अधिक क्या बताएं व्याकरण (पाणिनी), गणित (आर्यभट्ट), चिकित्सा (चरक-सुश्रुत) वराहमिहिर, भास्कराचार्य और खगोल विज्ञान के रूप में जो आधार ब्राह्मणों ने दिया, उसी पर आज का आधुनिक विज्ञान खड़ा है? महर्षि दयानंद सरस्वती जैसे क्रांतिकारी हुए जिन्होंने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देकर अंधविश्वास मिटाया। दोस्तों इतिहास उठाकर देख लीजिए, ब्राह्मण ने सदैव देश का साथ दिया है, कभी देश-द्रोह नहीं किया।

Brahman Mahapurush

अब समय केवल सुनने का नहीं, बल्कि जवाब देने का है। क्या हिंदू धर्म की सहिष्णुता उसकी कमजोरी मान ली गई है? क्या हिंदू धर्म की इतनी ही वैल्यू रह गई है कि कोई भी आए, हमारी आस्था का अपमान करे और बिना किसी जवाबदेही के चला जाए? यदि कोई हमारे धर्म और हमारे पूर्वजों का अपमान करता है, तो हमें चुप नहीं बैठना चाहिए। राजकुमार भाटी जैसे लोगों पर FIR होनी चाहिए और कानूनी रूप से अपनी आवाज उठानी चाहिए। यदि हम आज संगठित होकर विरोध नहीं करेंगे, तो कल कोई भी हमारी संस्कृति की जड़ों पर प्रहार करने की हिम्मत करेगा।

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