(Bengal Election 2026 |क्या आज बंगाल पाकिस्तान होता? | The Untold Story of Dr. Syama Prasad Mookerjee)
दोस्तों! क्या आप जानते हैं कि अगर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी न होते, तो आज का हमारा बंगाल भी बांग्लादेश का हिस्सा होता? आखिर क्या थी मुस्लिम लीग और मोहम्मद अली जिन्ना की वो खतरनाक मांग? उस समय बंगाल के मुख्यमंत्री हुसैन शहीद सुहरावर्दी ने क्या शातिर चाल चली थी? कैसे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अकेले दम पर बंगाल को भारत से कटने से बचा लिया? आइए जानते हैं...
कहानी है 1947 की। देश का बंटवारा तय हो चुका था। मुस्लिम लीग और मोहम्मद अली जिन्ना की मांग थी कि पूरा का पूरा बंगाल (जिसमें आज का पश्चिम बंगाल और कलकत्ता भी शामिल था) पाकिस्तान का हिस्सा बने। लेकिन रुकिए, कहानी में एक और 'मास्टरप्लान' चल रहा था। उस समय बंगाल के मुख्यमंत्री थे हुसैन शहीद सुहरावर्दी। उसने एक नई चाल चली । - 'यूनाइटेड सॉवरेन बंगाल' (United Sovereign Bengal)। यानी न भारत, न पाकिस्तान, बंगाल एक अलग देश बनेगा।"
यह सुनते ही हर एक भारतीय को गुस्सा आना स्वाभाविक है? लेकिन असलियत ये थी कि इस 'आज़ाद बंगाल' में भी बहुसंख्यक आबादी और सत्ता मुस्लिम लीग के ही हाथ में रहने वाली थी। 1946 के 'डायरेक्ट एक्शन डे' (Direct Action Day) के दंगों में कलकत्ता की सड़कों ने जो खून-खराबा देखा था, उसके बाद यह साफ था कि अगर पूरा बंगाल एक रहा, तो कलकत्ता और पश्चिमी बंगाल के हिंदुओं का क्या हश्र होगा।
How Dr. Syama Prasad Mookerjee Saved West Bengal from Pakistan
दोस्तों पर डरने की आवश्यकता नहीं है, ईश्वर सब देखते हैं । दोस्तों यहाँ एंट्री होती है डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की। जब बड़े-बड़े नेता खामोश थे या समझौते के मूड में थे, तब मुखर्जी जी ने सीधा सा गणित सामने रखा। उन्होंने कहा - 'अगर धर्म के नाम पर भारत का बंटवारा हो रहा है, तो उसी आधार पर बंगाल का भी बंटवारा होना चाहिए!'""उन्होंने साफ कह दिया कि 'यूनाइटेड बंगाल' का मतलब है हिंदुओं को हमेशा के लिए एक ऐसी सरकार के भरोसे छोड़ देना, जिसने कुछ महीने पहले ही कलकत्ता को जलने दिया था। उन्होंने नारा दिया कि पश्चिमी बंगाल का हिंदू-बहुल इलाका, और सबसे महत्वपूर्ण—कलकत्ता, हर हाल में भारत का हिस्सा रहेगा।""डॉ. मुखर्जी ने 'बंगाल पार्टीशन लीग' बनाई। उन्होंने गाँव-गाँव जाकर, सभाएं करके माहौल बनाया। सुहरावर्दी और कुछ कांग्रेसी नेता (जैसे शरत चंद्र बोस) जो 'यूनाइटेड बंगाल' का सपना देख रहे थे, मुखर्जी के तर्कों के आगे टिक नहीं पाए।
मुखर्जी ने लॉर्ड माउंटबेटन और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर ऐसा कूटनीतिक दबाव बनाया कि उन्हें झुकना पड़ा। अंततः 20 जून 1947 को बंगाल विधानसभा में वोटिंग हुई और तय हुआ कि बंगाल का बंटवारा होगा। पूर्वी हिस्सा पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) गया, और पश्चिमी हिस्सा, अपने गौरवशाली कलकत्ता शहर के साथ, भारत का पश्चिम बंगाल बना।"
परन्तु दोस्तों आज तक कुछ ऐसी सरकारों ने बंगाल के लोगों के साथ अत्याचार किया, आज की विद्यमान बंगाल की सरकार में ऐसा ही लगता है कि सम्भवतः यह भारत का नहीं अपितु बांग्लादेश का ही हिस्सा है । बंगाल के चुनाव का परिणाम क्या होगा यह तो समय बताएगा, परन्तु बंगाल की स्थिति आज भी अत्यन्त दयनीय है । ईश्वर बंगाल को पुनः उसके गौरवशाली अस्तित्व को प्राप्त कराए यही ईश्वर से प्रार्थना है।! जय हिन्द!"