Kya Hanuman Ji Bandar The ?
क्या हनुमान् जी बन्दर थे, यदि हां तो इसका क्या प्रमाण है, और यदि नहीं तो हम उन्हें बन्दर क्यों बोलते हैं, आइए आज हम सारी बात प्रमाण सहित जानेंगे ।
दोस्तों प्रमाण देने से पहले मैं आपसे एक प्रश्न पूछना चाहता हूं, आज भारत में बहुत सारे लोग अपने नाम के साथ सिंह लगाते हैं, बहुत लोग मोर भी लगाते हैं, अब आप मुझे बताइए यदि वानर कहने से हनुमान् जी बन्दर प्रजाति के हैं, तो क्या सिंह लगाने वाले शेर की प्रजाति के हैं क्या, मोर लगाने वाले मोर पक्षी की प्रजाति के हैं क्या ?
ये बात आप मुझे कमेंट बोक्स में बताइए । आगे चलते हैं ।
Kya Hanuman Ji Bandar The ? जानिए प्रमाण -
दूसरा प्रमाण हनुमानजी अपने कंधे पर जनेऊ धारण किए रहते थे, कांधे मूंज जनेऊ साजे । जो केवल मनुष्यों में ही पाया जाता है।
हनुमान जी के दादा का नाम प्रह्लाद विद्याधर था । उनके पिता का नाम पवन और माता का नाम अंजनी था। बंदरों में नामकरण की कोई परंपरा नहीं होती, लेकिन हनुमानजी का नामकरण संस्कार उनके माता-पिता द्वारा किया गया था। वाल्मीकि रामायण में वानर जाति के पुरुषों को आर्यों के वंश से संबंधित बताया गया है।एक और प्रमाण बाली, सुग्रीव, अंगद और तारा सभी वानर जाति के थे और मनुष्य थे। बाली की पत्नी तारा को एक विदुषी स्त्री के रूप में वर्णित किया गया है। अंगद और सुग्रीव ने बाली का अंतिम संस्कार शास्त्रीय विधि से किया, जो केवल मनुष्यों में ही संभव है। हनुमानजी वैदिक धर्म के अनुयायी थे और ब्रह्मचर्य का पालन करते थे। बंदर ब्रह्मचर्य का पालन नहीं कर सकते, जबकि हनुमानजी सात्त्विक जीवन का पालन करते थे।
अब जैसा मैने बताया कि समाज में सिंह और मोर लगाने वालो को थोडी हम समझते हैं कि ये शेर प्रजाति के हैं या मोर की प्रजाति के हैं । ऐसे ही थे वानर, परन्तु एक षडयन्त्र के कारण हमने वानर से बन्दर समझ लिया । उनका मुख बन्दर की तरह दिखा दिया । हमारे हिन्दू अपने देवी देवताओं का उपहास स्वयं उडाते हैं । हनुमान् जी बन्दर थे, श्रीकृष्ण जी माखनचोर थे, भगवान् शिव नशा करते थे । आप स्वयं सोचो क्या ऐसा विधर्मियों में भी है क्या ? क्या उनके लोग अपने किसी ऐसे व्यक्ति का मज़ाक उडाते है? नहीं, क्योंकि वे अपने धर्म की रक्षा करते हैं लेकिन हम अपनी संस्कृति का मज़ाक उडाते हैं । इसलिए अपने देवी देवताओं और महापुरुषों का मज़ाक उडाना बंद कीजिए और अपनी संस्कृति पर गर्व कीजिए ।
जय बजरंग बली ।
Writer
Dr. Shubham Arya