आज मैं आपको Mother Teresa Reality in Hindi (समाज सेवा या धर्मांतरण? जानिए असली सच) के बारे में प्रमाण सहित वो बातें बताऊंगा, जिससे आपके होश उड़ जाएंगे। क्या मदर टेरेसा समाज सेवा के नाम पर इसाई धर्म में परिवर्तन कराती थी ? आखिर क्या लिखा है अरूप चटर्जी की उस पुस्तक में, जिसने पूरे देश में हाहाकार मचा दिया था। आखिर मदर टेरेसा के साथ काम करने वाले ने मदर टेरेसा के बारे में क्या सच्चाई बताई, जो आज तक हमसे छुपाई गई है ।
दोस्तों मेरा नाम है डॉ. शुभम्, और हर बार की तरह इस बार भी हम आपको सारे प्रमाणों के साथ यह वीडियो दिखाएंगे । उससे पहले चैनल को सब्सक्राइब और मुझे फॉलो कर लेना, क्योंकि दोस्तों बहुत मेहनत लगती है एक विषय को तैयार करने में । आइए शुरु से शुरु करते हैं
दोस्तों हमारे देश के लोग अहिल्याबाई होल्कर जी के योगदान को नहीं जानते होंगे । हमारे देश का युवा रानी दुर्गावती को नहीं जानेगा, रानी पद्मावती को नहीं जानेगा, पंडिता रमाबाई, रानी चेनम्मा, रुद्रमा देवी, रानी अब्बक्का चोटा, बेलु नाचियार आदि को नहीं जानता होगा । परन्तु इस देश की संस्कृति को नष्ट करने वाली, अंग्रेजों के द्वारा प्रसारित, समाजसेवा के नाम पर इसाईयत फैलाने वाली मदर टेरेसा के सामने हमारा समाज नतमस्तक हो जाता है । यहां तक कि विद्यालयों की पाठ्यपुतकों में भी इसका पाठ पढाकर गलत धारणाएं हमारे देश के बच्चो में डाली जाती हैं । और यह षडयन्त्र अनेकों वर्षों से चलाया जा रहा है ।
दोस्तों मदर टेरेसा कोई समाज सेविका नहीं थी, अपितु समाजसेवा का ढोंग करके इसाईयत फैलाया करती थीं ।Mother Teresa (मदर टेरेसा) का जन्म 1910 में स्कोप्जे (आज का North Macedonia) में हुआ था। वे 1929 में भारत आईं और Loreto Sisters नामक कैथोलिक संस्था के साथ जुड़ीं। वर्ष 1952 में कालीघाट, कोलकाता में इसने निर्मल हृदय नाम से एक अस्पताल बनाया, जो कि स्थानीय प्रशासन द्वारा सेवा के कार्य के लिए दिया गया था । परन्तु क्या पता था कि सब कुछ एक अलग ही षडयन्त्र के लिए किया जा रहा है ।
यूनाइटिड किंगडम में कार्यरत, पेशे से डॉक्टर, कोलकाता के रहने वाले डॉ. अरूप चटर्जी 1998 में एक पुस्तक प्रकाशित करते हैं – जिसका नाम था Mother Teresa: The Untold Story … उन्होंने दावा किया कि वे Missionaries of Charity के कार्यों को करीब से देखते रहे हैं ।
मदर टेरेसा की छुपी सच्चाई के पीछे का भयानक कारनामा
उन्होंने अपनी पुस्तक में मदर टेरेसा की वो सच्चाई बताई जिसे सुनकर आपके होश उड जाएंगे । पुस्तक में लिखा है कि मरते समय लोगों को ईसाई प्रार्थना कराई जाती थी। इसे उन्होंने “Hidden conversion” कहा। संस्था को दुनिया भर से भारी दान मिला लेकिन उपचार ठीक नहीं होता था । और एक बात जो बहुत आश्चर्य वाली है कि मदर टेरेसा disposable syringes को दोबारा उपयोग करती थी। अर्थात् जो सिरिंज एक बार प्रयोग कर ली जाती थीं वो उसे दुबारा दूसरे मरीज पर प्रयोग करती थी, जिससे रोगी जल्दी मर जाए । उसके यहां कईं डॉक्टर मैडिकली ट्रेंड नहीं थे, फिर भी वे जैसे तैसे उपचार करते थे ।
Writer :
Dr. Shubham Arya